चाँद सा चेहरा सुनहरा

—◆◆◆— चंचल सी चाँदनीं सा चमकता हुआ चेहरा। सुन्दरता तेरे रूप की ज्यों चाँद सुनहरा। तुम कितनी खूबसूरत हो मेरी दिलरुबा। तुझसे मेरी शाम और

एक किस्सा

—◆◆◆— एक किस्सा शुरू हुआ अधूरी चाहतों का एक सिलसिला चल पड़ा अधजगे रातों का। एक अज़नबी रिश्ता बना और पहचान हो गयी। अनजाने ही