अध्याय~ 1

📖#प्रेममयी_प्रेमग्रन्थ✍ |~~~~~~~~~~| मैं अपने गीत,गजलों को,, तुम्हारे नाम करती हूँ तुम्हारा ज़िक्र होगा सिर्फ,,यही एलान करती हूँ लिखूँगी नज़्म अब जो भी, तुम्हारे प्रेम की

मतदान

—◆◆◆— अरे क्या जरूरत है करने की मतदान? बना दो अपनी ज़िंदगी को शमशान, जाओ! करो बेतुके काम! क्या जरूरत है, करना है जब नाम,

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