अहम् निरन्तर देता भय

—◆◆◆— 🌟स्वरांजली🌟 शब्दों की गूँज🌟 अहम् निरन्तर देता भय वाकिफ़ कहाँ जमाना हैं। हार रहा इंसान इससे यह बुनियादें खोद रहा हैं। दर्द वेदना के

आकांक्षाओं की एक दौड़ लगी

—◆◆◆— 🌟स्वरांजली🌟 शब्दों की गूँज🌟 क्षणिक खुशियां पाने की होड़ लगी। आकांक्षाओं की एक दौड़ लगी।। विश्वास के रिश्तों में होड़ लगी। झूठे जज्बातों की

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