”कल्कि”से “कलम”बनी,

—◆◆◆— 🌟स्वरांजली🌟 शब्दों की गूँज🌟 “कल्कि”से “कलम”बनी, कलम ही स्त्रोत ज्ञान भंडार, ढाल बने कभी, कभी बने तलवार, शब्दबाणों के कटु तीरों से, करती अराजकता

“स्तब्ध” टकटकी लगाए,

—◆◆◆— 🌟स्वरांजली🌟 शब्दों की गूँज🌟 टकटकी लगाए, स्तब्ध खड़ी मैं.. रोकने की चाह मैं, मौन खड़ी मैं.. चीख़ती – पुकारती, जड़वत, मन ही मन, #आवाज