देखा है…

—◆◆◆— चेहरे में चेहरा तलाशते आज देखा है,मैंने आईना साफ़ साफ़ देखा है, आँखों में आँखे झांकते हुए,ज़िंदगी का उलझा रुआब देखा है, कहीं भी

मतदान

—◆◆◆— अरे क्या जरूरत है करने की मतदान? बना दो अपनी ज़िंदगी को शमशान, जाओ! करो बेतुके काम! क्या जरूरत है, करना है जब नाम,