ओ पालनहारे ! ये जग अब तेरे सहारे भूल हुई जो मानवता से,केवल उसको तू संहारे बच्चे तेरे करें पुकार,हर ओर मचा है हाहाकार धू

याद है वो सन संतालिस का मंजर, मां भारती के दिल में धंसा था बन्टवारे का खंजर रोई थी बहुत वह बच्चे अपने बांटकर,बाकी कुछ

अंकित सरीखे कितने लाल हुए धारा को प्यारे कितने ही मासूम बने हैं मौत के बड़े निवाले मरा किसी का लाल,किसी की मांग का छिना

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