आजकल ……..

—◆◆◆— आजकल …खिड़कियों पर गौरेया नहीं दिखती आजकल …पैरों में घर की बिल्लियां नहीं खेलती आजकल …घरों में रिश्तों की महक नहीं खिलती आजकल …..कुछ

यह तो आदिशक्ति हैं ..

—◆◆◆— गागर ऊपर गागर का मेलये बखूबी  निभातीं हैंमरूधरा की दुश्वारियों मेंये जीवन का खेल निभातीं हैंकोई साधारण नारी नहीं,यह तो आदिशक्ति हैं । गागर

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