प्रेम के ये सुमन..!

—◆◆◆—


🌟स्वरांजली🌟 शब्दों की गूँज🌟


लाए है थाल भर हम लाए
श्रद्धा के ये सुमन,
स्वीकारों आज मेरे भगवन
प्रेम के ये सुमन..!

कैसे तुझे पाऊँ?
कैसे रिझाऊ?
मैं नादान बालक
कुछ न समझ पाऊँ,
करता हूँ बस भाव से अर्पण
भावों के ये सुमन…!

तुमपर श्रद्धा
प्रेम का नाता,
तेरे नाम के सिवा
कुछ न सुहाता,
गाता हूँ..चरणों में कर नमन
भक्ति के ये सुमन..!

भक्ति योग है
तुझसे वियोग है,
तुमसे मिलन का
कब संजोग है?
करता रहूँगा पेश मैं हरदम
सेवा के ये सुमन..!

—◆◆◆—


रचनाकार [{ कवयित्री/कवि }] :-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा✍


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