बस उत्तर बतलाना

—◆◆◆—


🌟स्वरांजली🌟 शब्दों की गूँज🌟


आवाज दे रही हूँ,प्रियतम दूर मत जाना।

प्रिय साज दे रही हूँ,तुम मेरे पास आना।

जब से मिले हो मुझे,कोई सखी न सहेली।

साथ कितना सुख था,जबकि रहती अकेली।

विरह सहना मुश्किल,पर दुर्लभ तुम्हे पाना।

आस की किरण जगी,अद्वितीय प्यार से।

तुम मेरे बन गये,मानवी अधिकार से।

प्रश्न कौंधते हैं,बस उत्तर बतलाना।

—◆◆◆—


रचनाकार [{ कवयित्री/कवि }] :- रामचंद्र शुक्ला✍


© OfficeOfswara.com

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