दानव था नज़रे गड़ाए उसपर

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बूँद बूँद और कतरा कतरा सँजोया माँ ने नौ महीने कोख में अपने,
होगा भविष्य उज्जवल इक दिन, देखे अनन्त मां बाप ने सपने।।

पाल पोस कर राज दुलारी को देख के वो हर्षाते थे,
लगे न कोई नज़र बुरी हर बला से उसे बचाते थे।।

काल मगर था ताक लगाए,बुरे दिन उस कुटुंब के आए
तितली सी कोमल उस बच्ची पर दानव था नज़रे गड़ाए।।

मौका पाकर इक दिन उसने नोच डाले वो कोमल पर,
दशा ऐसी उसकी कर डाली देख के जाए जिगर सिहर।।

क्षत विक्षत उस परी की माँ का सब कुछ मानो लूट लिया,
हाय विधाता! इस दुखद हादसे को तूने क्यों होने दिया।।

कब्र भी उसकी रो उठी जब हाल उसका देखा,
समय से पहले मिटी उस मासूम की जीवन रेखा।।

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रचनाकार:- स्वीटी गुप्ता

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10 comments

  1. डर जाती है माँ आज जब उसकी बेटी जवां होती है, क्योंकि हर गली हर नुक्कड़ किसी न किसी की नियत खराब होती है।

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  2. बहुत ही दुखद सत्य जो मन को पिघल देती। ऐसी बडी मुसीबत से बचकर रहने का उपाय अबतक किसी के पास नहीं है। ईश्वर से प्रार्थना करने के सिवा। ☹️

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