जीवन राग

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प्रिय ! फिर आओ प्यार करें… ! एक दूजे की आँखों में
मधुर स्वप्न साकार करें… !!

बरसा दें स्नेह की धारा
सकुचा कर स्पर्श करें… !
दिव्य बने यह मिलन, चलो आलिंगन बद्ध करें…!!

करें समर्पण तन-मन का
धीरज न तनिक धरें… !
बनें प्रेम की परिभाषा
सुध-बुध को हम बिसरें …!!

संगम बने अविस्मरणीय प्रेमातिरेक करें… !
संयोग अलौकिक हो
आत्मा! आओ एक करें…!!

प्रिय ! फिर आओ प्यार करें… !
एक दूजे कीआँखों में
सुख-स्वप्न साकार करें…!!

—◆◆◆—

© OfficeOfswara.com

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रचनाकार:- काव्याक्षरा

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