न जानूँ

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दुनिया कितनी बदल गयी है
टूटे माला जस बिखर गयी है

जो कभी इधर रहा करती थी
अब न जानूं किधर गयी है

सिमट ग है वो अपने पन में
अपना कह कर उध गयी है

तडपाती असफल करती वो
जिन्दगी मेरी बिखर गयी है

—◆◆◆—

© OfficeOfswara.com

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रचनाकार:- अवधेश तिवारी

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