उफ़्फ़

—◆◆◆—

अफ़सोस ये भी है कि वो
हाल-ए-दिल नहीं पूछते
कहते हैं… !!
मायूस दिखती हो
थोड़ा खुश रहा करो……!!

दीवानग़ी हमारी उन्हें
नागवार लगती हैं
कहते हैं…!!
कभी तो कोई काम
ढंग का किया करो……!!

इज़हार-ए-मुहब्बत
पर वो हैरान होते हैं
कहते हैं…!!
बहुत बोलती हो
कभी चुप भी हुआ करो……!!

इश्क के मसलों की
तो बात ही न पूछो
कहते हैं …!!
बकवास करती हो
थोड़ी संजीदा रहा करो……!!

उल्फ़त की बातें भी
उन्हें फालतू लगती हैं
कहते हैं…!!
कभी तो अपना लहज़ा
बदल लिया करो……!!

—◆◆◆—

© OfficeOfswara.com

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रचनाकार:- काव्याक्षरा

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#स्वरा

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