एहसान

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मैं हरगिज़ जानती हूँ……!!
एहसान मानती हूँ………!!

माँगा नहीं है कुछ मैंने
तुम खुद ही देना चाहते हो… !
मेरी ज़िंदगी की मुश्किलें
खुद आज़माना चाहते हो… !

वादे करते हो बड़े-बड़े
जिन्हें खुद निभाना चाहते हो.. !
मेरा हाथ थामे उम्र को
मेरे साथ बिताना चाहते हो…. !

हर वक़्त मेरी परवाह
दिल में बस जाना चाहते हो… !
शांत-सी है ज़िंदगी
रोमांच लाना चाहते हो….. !

ताउम्र मेरे होकर
छाया बन जाना चाहते हो… !
तुम ही तो हर बात पर
मेरी सोच बदलना चाहते हो… !

तारीफ़ करते हो खुद ही
ताली बजाना चाहते हो… !
तुम फरिश्ते हो प्रेम के
केवल समर्पण चाहते हो…. !

मैं उलझी हूँ विचारों में
तुम वक़्त चुराना चाहते हो…. !
हरगिज़ दिलकश अंदाज़ से
दिल में बस जाना चाहते हो….. !

तुम इश्क की तामील हो
मिसाल बनना चाहते हो..!
तुम खुशनुमा एहसास से
हर पल महकाना चाहते हो… !

—◆◆◆—

© OfficeOfswara.com

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रचनाकार:- काव्याक्षरा

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#स्वरा

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