प्रेम की कहानी

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इतनी सी हैं मेरे
प्रेम की कहानी !

मिथ्था ज्यादा हैं
कम हैं रूहानी!!

इसके भावो से ,
गुम सी मृदुलता हैं !

मीठापन कम
तीखापन की बहुलता हैं!!

इसमे काटो के चुभन का ,
एहसास होता हैं!

इसमे अंगारो के तपन का
वास होता हैं!!

—◆◆◆—

© OfficeOfswara.com

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रचनाकार:- कवि कुमार पिंटू

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#स्वरा

|| धन्यवाद||

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