प्राच्य सभ्यता त्यागकर

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प्राच्य सभ्यता त्यागकर,
पश्चिमी होते जा, रहे है,,

अपनी संस्कृति,
अपने संस्कारों की,,
स्वयं ही,,
आहुति लगाए जा रहे है ….

भारतभूमि है पहचान,…..
धर्म , कर्म, और सौहार्द की,,

अपनी इन पहचानों को भी,,
दिखावे की,,
बलि चढाते जा रहे है…..

प्राच्य सभ्यता त्यागकर,
पश्चिमी होते जा, रहे है,,

—◆◆◆—

© OfficeOfswara.com

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रचनाकार:- सुनिधि चौहान✍

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