नाराज़गी

—◆◆◆—

ये ज़िंदगी की राह कुछ
आसान हो गई होती…
थोड़ा वो झुक गया होता
थोड़ा तुम झुक गई होती… !!

ये मसले ज़िंदगी के
कयामत न बनते…
थोड़ा वो समझ गया होता
थोड़ा तुम समझ गई होती… !!

जो मुद्दे अना के
न बनते छोटी बात पर…
थोड़ा वो भूल गया होता
थोड़ा तुम भूल गई होती… !!

यूँ रूठने के सिलसिले
न इतने लंबे होते…
थोड़ा वो मान गया होता
थोड़ा तुम मान गई होती… !!

—◆◆◆—

© OfficeOfswara.com

———

रचनाका:- काव्याक्षरा✍

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#स्वरा

10 comments

      1. स्वागत है … 🙏
        उत्कण्ठित रहता हूँ आपकी रचनाएँ पढ़ने के लिए …. 👌👍

        Liked by 1 person

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