काव्य की सार्थकता

—◆◆◆—

गर अपने “काव्य” के माध्यम से
कुछ “सोते” हुओं को जगा पाया

गर अपने “लेखन” के द्वारा
कुछ “भटकों” को रास्ता दिखा पाया

तो हे माँ भारती ! मैं समझूंगा कि

मैं कुछ #सेवा कर सका तुम्हारी
तेरे कमलवत् चरणों में
कुछ भेंट चढ़ा सका मैं बारी बारी

—◆◆◆—

——–

रचनाकार:- रवि अग्रवाल

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#स्वरा

|| धन्यवाद||

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